रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए विवादित बयान मामले में आजम खान को दो साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसके साथ ही उन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान अधिकारियों को लेकर दिए गए एक बयान से जुड़ा है, जिसका वीडियो उस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के तहत इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।
2019 चुनाव प्रचार के बयान पर आया फैसला
कोर्ट ने जिस मामले में फैसला सुनाया, वह करीब सात साल पुराना है। चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान ने मंच से अधिकारियों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि “कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरना” और अधिकारियों को लेकर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
उन्होंने अपने बयान में तत्कालीन डीएम समेत जिले के अफसरों का जिक्र करते हुए कहा था कि वे “तनखइया” हैं और गठबंधन की सरकार आने पर उनसे “जूते साफ करवाने” जैसी बात कही थी। बयान सामने आने के बाद विपक्षी दलों और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई थी।
चुनाव आचार संहिता उल्लंघन में दर्ज हुआ था मामला
आजम खान के इस बयान को लेकर चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का केस दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई। फिलहाल आजम खान रामपुर जेल में बंद हैं।
अप्रैल में भी कोर्ट से मिला था बड़ा झटका
इससे पहले अप्रैल 2026 में भी आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को बड़ा कानूनी झटका लगा था। रामपुर की सेशन कोर्ट ने दोनों की अपील खारिज करते हुए उनकी सजा को बरकरार रखा था।
दरअसल, दोनों पर 2019 में दो अलग-अलग पैन कार्ड बनवाने का आरोप लगा था। इस मामले में नवंबर 2025 में एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही दोनों पर जुर्माना भी लगाया गया था।
